हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शिया फेडरेशन जम्मू के तत्वावधान में पुंछ के टाउन हॉल में भव्य रहमत-ए-आलम सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें उलेमा और ज़ाकिरीन, बुद्धिजीवियों, सामाजिक और धार्मिक हस्तियों, सम्मानित नागरिकों, युवाओं तथा छात्रों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) के पवित्र जीवन, उनके विश्वव्यापी रहमत के संदेश, शांति, प्रेम, भाईचारे, सहिष्णुता और आपसी सम्मान को बढ़ावा देना था।
इस अवसर पर भारत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन अब्दुल मजीद हकीम इलाही का विशेष संदेश भी प्रस्तुत किया गया, जिसे मौलाना सैयद करामत हुसैन जाफरी ने सम्मेलन के प्रतिभागियों के सामने पढ़कर सुनाया। अपने संदेश में उन्होंने इस्लामी एकता, अंतरधार्मिक सद्भाव, आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
संदेश का पूरा पाठ इस प्रकार है:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
सभी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सारे संसार का पालनहार है। दरूद और सलाम हमारे सरदार और पैगंबर हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) और उनके पाक अहलेबैत तथा उनके चुने हुए साथियों पर हो।
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु
शहर जम्मू (पुंछ) में आयोजित इस भव्य इस्लामी एकता सम्मेलन पर मुझे बहुत खुशी है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शिया और अहले सुन्नत के उलेमा, बुद्धिजीवियों, सामाजिक और सांस्कृतिक हस्तियों के साथ हिंदू और सिख समुदाय के प्रतिनिधियों की भागीदारी एकता, आपसी सम्मान, प्रेम और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का सुंदर संदेश है। मैं इस पवित्र कार्यक्रम के आयोजकों, विशेष रूप से शिया फेडरेशन जम्मू का दिल की गहराइयों से आभार व्यक्त करता हूं।
हालांकि मुझे इस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था, लेकिन कुछ जरूरी व्यस्तताओं के कारण मैं स्वयं उपस्थित नहीं हो सका। इसलिए अपनी आत्मीयता और शुभकामनाएं व्यक्त करने के लिए यह संदेश हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मौलाना सैयद करामत हुसैन जाफरी के माध्यम से आप लोगों तक भेज रहा हूं। आशा है कि वे मेरा सलाम और शुभकामनाएं सम्मेलन में उपस्थित सभी सम्मानित लोगों तक पहुंचाएंगे।
जम्मू-कश्मीर सदियों से विभिन्न धर्मों, संप्रदायों और संस्कृतियों से जुड़े लोगों की साझा भूमि रहा है। इस क्षेत्र का सांस्कृतिक इतिहास आपसी मेल-जोल, सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की कई शानदार मिसालें पेश करता है। आज भी इस परंपरा को मजबूत करना और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
इस्लामी एकता का अर्थ धार्मिक और मजहबी मतभेदों को समाप्त करना नहीं है, बल्कि मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे का सम्मान करना, समान बातों पर मिलकर काम करना और विभाजन तथा दुश्मनी से बचना है। पवित्र कुरआन हमें स्पष्ट रूप से निर्देश देता है: “और तुम सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मजबूती से थाम लो और आपस में मत बंटो।”
आज के दौर में उलेमा, धार्मिक नेताओं और सामाजिक हस्तियों की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्हें चाहिए कि वे समाज, विशेष रूप से युवा पीढ़ी को प्रेम, शांति, नैतिकता, न्याय, सहिष्णुता और आपसी सम्मान का संदेश दें। हमारे मतभेद एक-दूसरे से दूरी और दुश्मनी का कारण न बनें, बल्कि समान मूल्यों पर मिलकर काम करने का रास्ता तैयार करें।
विभिन्न धर्मों के बीच शांति, सच्चाई, न्याय, मानवता की सेवा और दूसरों का सम्मान जैसी कई समान मान्यताएं मौजूद हैं। यदि हम इन समान मूल्यों को आधार बनाकर एक-दूसरे के साथ सहयोग करें, तो समाज में शांति और स्थिरता तथा आपसी विश्वास को और मजबूत किया जा सकता है।
भारत अपनी प्राचीन सभ्यता और महान धार्मिक एवं सांस्कृतिक विविधता के कारण अंतरधार्मिक सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश करने की क्षमता रखता है। आशा है कि जम्मू-कश्मीर भी एकता, भाईचारे और अंतरधार्मिक संवाद को बढ़ावा देने में प्रभावी और सकारात्मक भूमिका निभाएगा।
मैं एक बार फिर इस सम्मेलन के सम्मानित आयोजकों, विशेष रूप से शिया फेडरेशन जम्मू को बधाई देते हुए, रहबर-ए-मुअज्ज़म इंक़लाब-ए-इस्लामी हज़रत आयतुल्लाह सैयद मुजतबा इमाम ख़ामेनेई की ओर से सभी उलेमा, धार्मिक नेताओं, सामाजिक एवं सांस्कृतिक हस्तियों तथा सम्मेलन में शामिल सभी लोगों को सलाम और शुभकामनाएं पेश करता हूं।
आशा है कि यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस्लामी एकता, अंतरधार्मिक सद्भाव, शांति, भाईचारे और आपसी सहयोग के लिए लगातार और प्रभावी प्रयास की शुरुआत साबित होगा।
अल्लाह तआला मुसलमानों के बीच एकता और भाईचारे को मजबूत करे, सभी धर्मों के अनुयायियों के बीच प्रेम, सम्मान और आपसी सहयोग को बढ़ावा दे तथा भारत, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर को शांति, सुरक्षा, भाईचारे और विकास से संपन्न करे।
वस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु
अब्दुल मजीद हकीम इलाही
भारत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि
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